"बाज़ार में अपनी दुकान सजाने वाली हर महिला में, उसकी पूर्वजों की गूंज धड़कती है: वे जिन्होंने सूरज से मोलभाव किया, अपनी साड़ियों में सपने बुने और मसालों को आज़ादी की मुद्रा में बदल दिया।"